***मेरी ये पंक्तियाँ पूरे विश्व के समस्त थर्ड जेंडर्स/
"तीसरी ताली''
ताली
तेरी हो मेरी हो
आवाज़ भले ही उसमें हो
पर होती वो खाली है.
मगर एक होती ‘तीसरी ताली’
न नर की न ही नारी की
ये होती अर्धनारीश्वर की
यानि ‘हिजड़ों’ की.
‘तीसरी ताली’ में छिपा
दर्द-पीड़ा-कराहट
फिर भी
इनमें संगीत है बजता.
‘तीसरी ताली’ कभी होती नहीं खाली
इसमें भरा होती
हम सबके लिए
खुशियाँ, मंगल गान और दुवाएँ
पर, इनकी इस ताली में
क्या तुम्हें कभी दिखे
खून के छींटे,
और
गौर से कभी देखें
इनके तिरस्कृत चेहरें.
या कभी एह्सास किया है

